وَقَالَ
ٱلَّذِي
ٱشۡتَرَىٰهُ
مِن
مِّصۡرَ
لِٱمۡرَأَتِهِۦٓ
أَكۡرِمِي
مَثۡوَىٰهُ
عَسَىٰٓ
أَن
يَنفَعَنَآ
أَوۡ
نَتَّخِذَهُۥ
وَلَدٗاۚ
وَكَذَٰلِكَ
مَكَّنَّا
لِيُوسُفَ
فِي
ٱلۡأَرۡضِ
وَلِنُعَلِّمَهُۥ
مِن
تَأۡوِيلِ
ٱلۡأَحَادِيثِۚ
وَٱللَّهُ
غَالِبٌ
عَلَىٰٓ
أَمۡرِهِۦ
وَلَٰكِنَّ
أَكۡثَرَ
ٱلنَّاسِ
لَا
يَعۡلَمُونَ
٢١
और मिस्र के जिस व्यक्ति ने उसे खरीदा था, उसने अपनी पत्नी से कहा : इसे आदर-मान से रखो। संभव है यह हमें लाभ पहुँचाए, अथवा हम इसे अपना पुत्र बना लें। इस प्रकार उस भूभाग में हमने यूसुफ़ के लिए क़दम जमाने की राह निकाली और ताकि उसे बातों (सपनों) का अर्थ सिखाएँ। और अल्लाह अपना आदेश पूरा करके रहता है। परन्तु अधिकतर लोग नहीं जानते।