قُل
لَّآ
أَمۡلِكُ
لِنَفۡسِي
ضَرّٗا
وَلَا
نَفۡعًا
إِلَّا
مَا
شَآءَ
ٱللَّهُۗ
لِكُلِّ
أُمَّةٍ
أَجَلٌۚ
إِذَا
جَآءَ
أَجَلُهُمۡ
فَلَا
يَسۡتَـٔۡخِرُونَ
سَاعَةٗ
وَلَا
يَسۡتَقۡدِمُونَ
٤٩
आप कह दें कि मैं अपने लिए किसी हानि या लाभ का मालिक नहीं हूँ, परंतु जो अल्लाह चाहे। प्रत्येक समुदाय का एक समय है। जब उनका समय आ जाता है, तो वे एक घड़ी न पीछे रहते हैं और न आगे बढ़ते हैं।