وَإِذَآ
أَذَقۡنَا
ٱلنَّاسَ
رَحۡمَةٗ
مِّنۢ
بَعۡدِ
ضَرَّآءَ
مَسَّتۡهُمۡ
إِذَا
لَهُم
مَّكۡرٞ
فِيٓ
ءَايَاتِنَاۚ
قُلِ
ٱللَّهُ
أَسۡرَعُ
مَكۡرًاۚ
إِنَّ
رُسُلَنَا
يَكۡتُبُونَ
مَا
تَمۡكُرُونَ
٢١
और जब हम लोगों को उनके किसी तकलीफ़ में पड़ने के बाद कोई दया चखाते हैं, तो अचानक उनके लिए हमारी आयतों के बारे में कोई न कोई चाल होती है। कह दें कि अल्लाह अधिक तेज़ उपाय करने वाला है। निःसंदेह हमारे भेजे हुए (फ़रिश्ते) लिख रहे हैं, जो तुम चाल चलते हो।