سُبۡحَٰنَ
ٱلَّذِي
خَلَقَ
ٱلۡأَزۡوَٰجَ
كُلَّهَا
مِمَّا
تُنۢبِتُ
ٱلۡأَرۡضُ
وَمِنۡ
أَنفُسِهِمۡ
وَمِمَّا
لَا
يَعۡلَمُونَ
٣٦
पवित्र है वह अस्तित्व जिसने सभी जोड़े पैदा किए, उन चीज़ों के भी जिन्हें धरती उगाती है, और स्वयं उन (मनुष्यों) के अपने भी, और उनके भी जिन्हें वे नहीं जानते।