إِنَّآ
ءَامَنَّا
بِرَبِّنَا
لِيَغۡفِرَ
لَنَا
خَطَٰيَٰنَا
وَمَآ
أَكۡرَهۡتَنَا
عَلَيۡهِ
مِنَ
ٱلسِّحۡرِۗ
وَٱللَّهُ
خَيۡرٞ
وَأَبۡقَىٰٓ
٧٣
निःसंदेह हम अपने पालनहार पर ईमान लाए हैं, ताकि वह हमारे लिए हमारे पापों और जादू के उन कामों को क्षमा कर दे, जो तूने हमें करने के लिए मजबूर किया है और अल्लाह सर्वोत्तम और सदा रहने वाला है।1