أَفَلَمۡ
يَرَوۡاْ
إِلَىٰ
مَا
بَيۡنَ
أَيۡدِيهِمۡ
وَمَا
خَلۡفَهُم
مِّنَ
ٱلسَّمَآءِ
وَٱلۡأَرۡضِۚ
إِن
نَّشَأۡ
نَخۡسِفۡ
بِهِمُ
ٱلۡأَرۡضَ
أَوۡ
نُسۡقِطۡ
عَلَيۡهِمۡ
كِسَفٗا
مِّنَ
ٱلسَّمَآءِۚ
إِنَّ
فِي
ذَٰلِكَ
لَأٓيَةٗ
لِّكُلِّ
عَبۡدٖ
مُّنِيبٖ
٩
क्या उन्होंने अपने आगे और पीछे आकाश और धरती को नहीं देखा? यदि हम चाहें तो उन्हें धरती में धँसा दें या उनपर आकाश के टुकड़े गिरा दें। निःसंदेह इसमें हर उस बंदे के लिए अवश्य एक निशानी है, जो अल्लाह की ओर लौटने वाला है।