۞ قُلۡ
إِنَّمَآ
أَعِظُكُم
بِوَٰحِدَةٍۖ
أَن
تَقُومُواْ
لِلَّهِ
مَثۡنَىٰ
وَفُرَٰدَىٰ
ثُمَّ
تَتَفَكَّرُواْۚ
مَا
بِصَاحِبِكُم
مِّن
جِنَّةٍۚ
إِنۡ
هُوَ
إِلَّا
نَذِيرٞ
لَّكُم
بَيۡنَ
يَدَيۡ
عَذَابٖ
شَدِيدٖ
٤٦
आप कह दें : मैं बस तुम्हें एक बात की नसीहत करता हूँ कि तुम अल्लाह के लिए दो-दो तथा अकेले-अकेले खड़े हो जाओ। फिर सोचो। तुम्हारे साथी1 में कोई पागलपन नहीं है। वह तो केवल तुम्हें एक कठोर यातना के आने से पहले डराने वाला है।