وَإِذَا
تُتۡلَىٰ
عَلَيۡهِمۡ
ءَايَٰتُنَا
بَيِّنَٰتٖ
قَالُواْ
مَا
هَٰذَآ
إِلَّا
رَجُلٞ
يُرِيدُ
أَن
يَصُدَّكُمۡ
عَمَّا
كَانَ
يَعۡبُدُ
ءَابَآؤُكُمۡ
وَقَالُواْ
مَا
هَٰذَآ
إِلَّآ
إِفۡكٞ
مُّفۡتَرٗىۚ
وَقَالَ
ٱلَّذِينَ
كَفَرُواْ
لِلۡحَقِّ
لَمَّا
جَآءَهُمۡ
إِنۡ
هَٰذَآ
إِلَّا
سِحۡرٞ
مُّبِينٞ
٤٣
और जब उनके समक्ष हमारी खुली आयतें पढ़ी जाती हैं, तो कहते हैं : यह तो एक ऐसा व्यक्ति है, जो चाहता है कि तुम्हें उन (पूज्यों) से रोक दे, जिनकी तुम्हारे बाप-दादा इबादत किया करते थे। तथा उन्होंने कहा : यह तो मात्र एक गढ़ा हुआ झूठ है। तथा जब उन काफ़िरों के पास सत्य आ गया, तो उन्होंने उसके बारे में कहा : यह तो मात्र एक खुला जादू है।