فَٱلۡيَوۡمَ
لَا
يَمۡلِكُ
بَعۡضُكُمۡ
لِبَعۡضٖ
نَّفۡعٗا
وَلَا
ضَرّٗا
وَنَقُولُ
لِلَّذِينَ
ظَلَمُواْ
ذُوقُواْ
عَذَابَ
ٱلنَّارِ
ٱلَّتِي
كُنتُم
بِهَا
تُكَذِّبُونَ
٤٢
सो आज तुम1 एक-दूसरे के लाभ और हानि के मालिक नहीं हो। तथा हम उन अत्याचारियों से कहेंगे : उस आग की यातना चखो, जिसे तुम झुठलाया करते थे।