وَقَالَ
ٱلَّذِينَ
ٱسۡتُضۡعِفُواْ
لِلَّذِينَ
ٱسۡتَكۡبَرُواْ
بَلۡ
مَكۡرُ
ٱلَّيۡلِ
وَٱلنَّهَارِ
إِذۡ
تَأۡمُرُونَنَآ
أَن
نَّكۡفُرَ
بِٱللَّهِ
وَنَجۡعَلَ
لَهُۥٓ
أَندَادٗاۚ
وَأَسَرُّواْ
ٱلنَّدَامَةَ
لَمَّا
رَأَوُاْ
ٱلۡعَذَابَۚ
وَجَعَلۡنَا
ٱلۡأَغۡلَٰلَ
فِيٓ
أَعۡنَاقِ
ٱلَّذِينَ
كَفَرُواْۖ
هَلۡ
يُجۡزَوۡنَ
إِلَّا
مَا
كَانُواْ
يَعۡمَلُونَ
٣٣
तथा वे लोग जो कमज़ोर समझे जाते थे, उन लोगों से कहेंगे, जो अहंकार करते थे : बल्कि (तुम्हारी) रात और दिन की चालों1 ही ने (हमें रोका था) जब तुम हमें आदेश देते थे कि हम अल्लाह के साथ कुफ़्र करें तथा उसके लिए साझी ठहराएँ। तथा जब वे यातना को देखेंगे तो (अपने दिल में) पछतावा को छिपाएँगे। और हम उन लोगों की गरदनों में तौक़ डाल देंगे, जिन्होंने कुफ़्र किया। उन्हें केवल उसी का बदला दिया जाएगा, जो वे किया करते थे।