۞ قُلۡ
مَن
يَرۡزُقُكُم
مِّنَ
ٱلسَّمَٰوَٰتِ
وَٱلۡأَرۡضِۖ
قُلِ
ٱللَّهُۖ
وَإِنَّآ
أَوۡ
إِيَّاكُمۡ
لَعَلَىٰ
هُدًى
أَوۡ
فِي
ضَلَٰلٖ
مُّبِينٖ
٢٤
आप (मुश्रिकों से) प्रश्न करें : तुम्हें आकाशों तथा धरती से1 कौन जीविका प्रदान करता है? आप कह दें : अल्लाह। तथा निःसंदेह हम या तुम अवश्य सन्मार्ग पर हैं अथवा खुली गुमराही में हैं।