فَقَالُواْ
رَبَّنَا
بَٰعِدۡ
بَيۡنَ
أَسۡفَارِنَا
وَظَلَمُوٓاْ
أَنفُسَهُمۡ
فَجَعَلۡنَٰهُمۡ
أَحَادِيثَ
وَمَزَّقۡنَٰهُمۡ
كُلَّ
مُمَزَّقٍۚ
إِنَّ
فِي
ذَٰلِكَ
لَأٓيَٰتٖ
لِّكُلِّ
صَبَّارٖ
شَكُورٖ
١٩
तो उन्होंने कहा : ऐ हमारे पालनहार! हमारी यात्राओं के बीच दूरी1 बना दे! तथा उन्होंने अपने ऊपर ज़ुल्म किया। अंततः हमने उन्हें कहानियाँ2 बना दिया और उन्हें पूरी तरह तित्तर-बित्तर कर दिया। निःसंदेह इसमें हर बड़े धैर्यवान् और बहुत शुक्र करने वाले के लिए कई निशानियाँ (शिक्षाएँ) हैं।