لَقَدۡ
كَانَ
لِسَبَإٖ
فِي
مَسۡكَنِهِمۡ
ءَايَةٞۖ
جَنَّتَانِ
عَن
يَمِينٖ
وَشِمَالٖۖ
كُلُواْ
مِن
رِّزۡقِ
رَبِّكُمۡ
وَٱشۡكُرُواْ
لَهُۥۚ
بَلۡدَةٞ
طَيِّبَةٞ
وَرَبٌّ
غَفُورٞ
١٥
सबा1 जाति के लिए उनके निवास-स्थान में एक निशानी2 थी। (उसके) दाएँ और बाएँ दो बाग़ थे। (हमने कहा था :) अपने पालनहार की दी हुई रोज़ी से खाओ और उसके प्रति आभार प्रकट करो। (यह) एक अच्छा शहर है तथा अति क्षमाशील पालनहार है।