فَهَلۡ
يَنظُرُونَ
إِلَّا
ٱلسَّاعَةَ
أَن
تَأۡتِيَهُم
بَغۡتَةٗۖ
فَقَدۡ
جَآءَ
أَشۡرَاطُهَاۚ
فَأَنَّىٰ
لَهُمۡ
إِذَا
جَآءَتۡهُمۡ
ذِكۡرَىٰهُمۡ
١٨
तो वे किस चीज़ का इंतज़ार कर रहे हैं सिवाय क़ियामत के कि वह उनपर अचानक आ जाए? तो निश्चय उसकी निशानियाँ1 आ चुकी हैं, फिर जब वह उनके पास आ जाएगी, तो उनके लिए नसीहत ग्रहण करना कैसे संभव होगा?