أَلَمۡ
يَأۡتِكُمۡ
نَبَؤُاْ
ٱلَّذِينَ
مِن
قَبۡلِكُمۡ
قَوۡمِ
نُوحٖ
وَعَادٖ
وَثَمُودَ
وَٱلَّذِينَ
مِنۢ
بَعۡدِهِمۡ
لَا
يَعۡلَمُهُمۡ
إِلَّا
ٱللَّهُۚ
جَآءَتۡهُمۡ
رُسُلُهُم
بِٱلۡبَيِّنَٰتِ
فَرَدُّوٓاْ
أَيۡدِيَهُمۡ
فِيٓ
أَفۡوَٰهِهِمۡ
وَقَالُوٓاْ
إِنَّا
كَفَرۡنَا
بِمَآ
أُرۡسِلۡتُم
بِهِۦ
وَإِنَّا
لَفِي
شَكّٖ
مِّمَّا
تَدۡعُونَنَآ
إِلَيۡهِ
مُرِيبٖ
٩
क्या तुम्हारे पास उन लोगों की ख़बर नहीं आई, जो तुमसे पहले थे; नूह़ की जाति की, तथा आद और समूद की और उन लोगों की जो उनके बाद थे, जिन्हें अल्लाह के सिवा कोई नहीं जानता? उनके रसूल उनके पास स्पष्ट निशानियाँ लेकर आए, तो उन्होंने अपने हाथ अपने मुँहों में लौटा लिए1 और उन्होंने कहा : निःसंदेह हम उसे नहीं मानते, जिसके साथ तुम भेजे गए हो और निःसंदेह हम तो उसके बारे में जिसकी ओर तुम हमें बुलाते हो, एक उलझन में डाल देने वाले संदेह में पड़े हुए हैं।