وَلَا
تَحۡسَبَنَّ
ٱللَّهَ
غَٰفِلًا
عَمَّا
يَعۡمَلُ
ٱلظَّٰلِمُونَۚ
إِنَّمَا
يُؤَخِّرُهُمۡ
لِيَوۡمٖ
تَشۡخَصُ
فِيهِ
ٱلۡأَبۡصَٰرُ
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और तुम अल्लाह को उससे हरगिज़ असावधान न समझो, जो अत्याचारी लोग कर रहे हैं! वह तो उन्हें उस दिन1 के लिए विलंबित कर रहा है, जिस दिन आँखें खुली रह जाएँगी।