قُل
لِّعِبَادِيَ
ٱلَّذِينَ
ءَامَنُواْ
يُقِيمُواْ
ٱلصَّلَوٰةَ
وَيُنفِقُواْ
مِمَّا
رَزَقۡنَٰهُمۡ
سِرّٗا
وَعَلَانِيَةٗ
مِّن
قَبۡلِ
أَن
يَأۡتِيَ
يَوۡمٞ
لَّا
بَيۡعٞ
فِيهِ
وَلَا
خِلَٰلٌ
٣١
(ऐ नबी!) मेरे उन बंदों से कह दो, जो ईमान लाए हैं कि वे नमाज़ क़ायम करें और उसमें से जो हमने उन्हें प्रदान किया है, छिपे और खुले ख़र्च करें, इससे पहले कि वह दिन आए, जिसमें न कोई क्रय-विक्रय होगा और न कोई मैत्री।