وَبَرَزُواْ
لِلَّهِ
جَمِيعٗا
فَقَالَ
ٱلضُّعَفَٰٓؤُاْ
لِلَّذِينَ
ٱسۡتَكۡبَرُوٓاْ
إِنَّا
كُنَّا
لَكُمۡ
تَبَعٗا
فَهَلۡ
أَنتُم
مُّغۡنُونَ
عَنَّا
مِنۡ
عَذَابِ
ٱللَّهِ
مِن
شَيۡءٖۚ
قَالُواْ
لَوۡ
هَدَىٰنَا
ٱللَّهُ
لَهَدَيۡنَٰكُمۡۖ
سَوَآءٌ
عَلَيۡنَآ
أَجَزِعۡنَآ
أَمۡ
صَبَرۡنَا
مَا
لَنَا
مِن
مَّحِيصٖ
٢١
और वे सब के सब अल्लाह के सामने पेश1 होंगे, तो कमज़ोर लोग उन लोगों से कहेंगे, जो बड़े बने हुए थे : निःसंदेह हम तुम्हारे अनुयायी थे, तो क्या तुम हमें अल्लाह की यातना से बचाने में कुछ भी काम आने वाले हो? वे कहेंगे : यदि अल्लाह ने हमें मार्ग दिखाया होता, तो हम तुम्हें अवश्य मार्ग दिखाते। अब हमारे लिए बराबर है कि हम व्याकुल हों, या हम धैर्य से काम लें। हमारे लिए भागने की कोई जगह नहीं है।