۞ قَالَتۡ
رُسُلُهُمۡ
أَفِي
ٱللَّهِ
شَكّٞ
فَاطِرِ
ٱلسَّمَٰوَٰتِ
وَٱلۡأَرۡضِۖ
يَدۡعُوكُمۡ
لِيَغۡفِرَ
لَكُم
مِّن
ذُنُوبِكُمۡ
وَيُؤَخِّرَكُمۡ
إِلَىٰٓ
أَجَلٖ
مُّسَمّٗىۚ
قَالُوٓاْ
إِنۡ
أَنتُمۡ
إِلَّا
بَشَرٞ
مِّثۡلُنَا
تُرِيدُونَ
أَن
تَصُدُّونَا
عَمَّا
كَانَ
يَعۡبُدُ
ءَابَآؤُنَا
فَأۡتُونَا
بِسُلۡطَٰنٖ
مُّبِينٖ
١٠
उनके रसूलों ने कहा : क्या अल्लाह के बारे में कोई संदेह है, जो आकाशों तथा धरती का पैदा करने वाला है? वह तुम्हें इसलिए बुलाता1 है कि तुम्हारे लिए तुम्हारे कुछ पाप क्षमा कर दे और तुम्हें एक निर्धारित अवधि तक अवसर दे।2 उन्होंने कहा : तुम तो हमारे ही जैसे इनसान हो। तुम चाहते हो कि हमें उससे रोक दो, जिसकी पूजा हमारे बाप-दादा करते थे। तो तुम हमारे पास कोई स्पष्ट प्रमाण लाओ।