وَيَٰقَوۡمِ
هَٰذِهِۦ
نَاقَةُ
ٱللَّهِ
لَكُمۡ
ءَايَةٗۖ
فَذَرُوهَا
تَأۡكُلۡ
فِيٓ
أَرۡضِ
ٱللَّهِۖ
وَلَا
تَمَسُّوهَا
بِسُوٓءٖ
فَيَأۡخُذَكُمۡ
عَذَابٞ
قَرِيبٞ
٦٤
और ऐ मेरी जाति के लोगो! यह अल्लाह की ऊँटनी1 तुम्हारे लिए एक निशानी है। अतः इसे छोड़ दो, अल्लाह की धरती में चरती फिरे और इसे कोई कष्ट न पहुँचाओ, अन्यथा तुम्हें अति शीघ्र यातना पकड़ लेगी।