قَالَ
يَٰقَوۡمِ
أَرَءَيۡتُمۡ
إِن
كُنتُ
عَلَىٰ
بَيِّنَةٖ
مِّن
رَّبِّي
وَءَاتَىٰنِي
مِنۡهُ
رَحۡمَةٗ
فَمَن
يَنصُرُنِي
مِنَ
ٱللَّهِ
إِنۡ
عَصَيۡتُهُۥۖ
فَمَا
تَزِيدُونَنِي
غَيۡرَ
تَخۡسِيرٖ
٦٣
उस (सालेह़) ने कहा : ऐ मेरी जाति के लोगो! क्या तुमने विचार किया कि यदि मैं अपने पालनहार की ओर से एक स्पष्ट प्रमाण पर हूँ और उसने मुझे अपनी दया प्रदान की हो, फिर मैं उसकी अवज्ञा करूँ, तो कौन है, जो अल्लाह के मुक़ाबले में मेरी सहायता करेगा? तुम मुझे घाटे में डालने के सिवा कुछ नहीं करोगे।