وَيَٰقَوۡمِ
ٱسۡتَغۡفِرُواْ
رَبَّكُمۡ
ثُمَّ
تُوبُوٓاْ
إِلَيۡهِ
يُرۡسِلِ
ٱلسَّمَآءَ
عَلَيۡكُم
مِّدۡرَارٗا
وَيَزِدۡكُمۡ
قُوَّةً
إِلَىٰ
قُوَّتِكُمۡ
وَلَا
تَتَوَلَّوۡاْ
مُجۡرِمِينَ
٥٢
ऐ मेरी जाति के लोगो! अपने पालनहार से क्षमा याचना करो। फिर उसकी ओर पलट आओ। वह आकाश से तुमपर खूब बारिश बरसाएगा और तुम्हारी शक्ति और अधिक बढ़ा देगा और विमुख हो कर अपराधी न बनो।