أَلَآ
إِنَّهُمۡ
يَثۡنُونَ
صُدُورَهُمۡ
لِيَسۡتَخۡفُواْ
مِنۡهُۚ
أَلَا
حِينَ
يَسۡتَغۡشُونَ
ثِيَابَهُمۡ
يَعۡلَمُ
مَا
يُسِرُّونَ
وَمَا
يُعۡلِنُونَۚ
إِنَّهُۥ
عَلِيمُۢ
بِذَاتِ
ٱلصُّدُورِ
٥
सुन लो! निःसंदेह वे अपने सीनों को मोड़ते हैं, ताकि उस (अल्लाह) से छिपे रहें। सुन लो! जब वे अपने कपड़े ख़ूब लपेट लेते हैं, वह जानता है जो कुछ वे छिपाते हैं और जो कुछ प्रकट करते हैं। निःसंदेह वह सीनों की बातों को भली-भाँति जानने वाला है।1