قَالَ
يَٰقَوۡمِ
أَرَءَيۡتُمۡ
إِن
كُنتُ
عَلَىٰ
بَيِّنَةٖ
مِّن
رَّبِّي
وَءَاتَىٰنِي
رَحۡمَةٗ
مِّنۡ
عِندِهِۦ
فَعُمِّيَتۡ
عَلَيۡكُمۡ
أَنُلۡزِمُكُمُوهَا
وَأَنتُمۡ
لَهَا
كَٰرِهُونَ
٢٨
नूह़ ने कहा : ऐ मेरी जाति के लोगो! क्या तुमने इस बात पर विचार किया कि यदि मैं अपने पालनहार की ओर से एक स्पष्ट प्रमाण पर हूँ और उसने मुझे अपने पास से दया1 प्रदान की हो, फिर वह तुम्हें सुझाई न दे, तो क्या हम तुम्हें उसको मानने पर मजबूर2 कर सकते हैं, जबकि तुम उसे नापसंद करते हो?