يُولِجُ
ٱلَّيۡلَ
فِي
ٱلنَّهَارِ
وَيُولِجُ
ٱلنَّهَارَ
فِي
ٱلَّيۡلِ
وَسَخَّرَ
ٱلشَّمۡسَ
وَٱلۡقَمَرَۖ
كُلّٞ
يَجۡرِي
لِأَجَلٖ
مُّسَمّٗىۚ
ذَٰلِكُمُ
ٱللَّهُ
رَبُّكُمۡ
لَهُ
ٱلۡمُلۡكُۚ
وَٱلَّذِينَ
تَدۡعُونَ
مِن
دُونِهِۦ
مَا
يَمۡلِكُونَ
مِن
قِطۡمِيرٍ
١٣
वह रात को दिन में दाखिल करता है, तथा दिन को रात में दाखिल करता है, तथा सूर्य एवं चाँद को काम में लगा रखा है। उनमें से प्रत्येक एक निश्चित समय तक चल रहा है।वही अल्लाह तुम्हारा पालनहार है। उसी का राज्य है। तथा जिन्हें तुम उसके सिवा पुकारते हो, वे खजूर की गुठली के छिलके के भी मालिक नहीं हैं।