أَوَلَمۡ
يَسِيرُواْ
فِي
ٱلۡأَرۡضِ
فَيَنظُرُواْ
كَيۡفَ
كَانَ
عَٰقِبَةُ
ٱلَّذِينَ
مِن
قَبۡلِهِمۡۚ
كَانُوٓاْ
أَشَدَّ
مِنۡهُمۡ
قُوَّةٗ
وَأَثَارُواْ
ٱلۡأَرۡضَ
وَعَمَرُوهَآ
أَكۡثَرَ
مِمَّا
عَمَرُوهَا
وَجَآءَتۡهُمۡ
رُسُلُهُم
بِٱلۡبَيِّنَٰتِۖ
فَمَا
كَانَ
ٱللَّهُ
لِيَظۡلِمَهُمۡ
وَلَٰكِن
كَانُوٓاْ
أَنفُسَهُمۡ
يَظۡلِمُونَ
٩
और क्या वे धरती में चले-फिरे नहीं कि देखते उन लोगों का परिणाम कैसा हुआ, जो उनसे पहले थे? वे उनसे अधिक शक्तिशाली थे और उन्होंने धरती को जोता-बोया और उसे आबाद किया उससे अधिक जितना उन्होंने उसे आबाद किया था, और उनके पास उनके रसूल खुली निशानियाँ लेकर आए। तो अल्लाह ऐसा न था कि उनपर अत्याचार करे, लेकिन वे स्वयं अपने ऊपर अत्याचार करते थे।