فَـَٔاتِ
ذَا
ٱلۡقُرۡبَىٰ
حَقَّهُۥ
وَٱلۡمِسۡكِينَ
وَٱبۡنَ
ٱلسَّبِيلِۚ
ذَٰلِكَ
خَيۡرٞ
لِّلَّذِينَ
يُرِيدُونَ
وَجۡهَ
ٱللَّهِۖ
وَأُوْلَٰٓئِكَ
هُمُ
ٱلۡمُفۡلِحُونَ
٣٨
अतः रिश्तेदार को उसका हक़ दो, तथा निर्धन और यात्री को (भी)। यह उन लोगों के लिए बेहतर है, जो अल्लाह का चेहरा चाहते हैं और वही सफल होने वाले हैं।