۞ يَٰٓأَيُّهَا
ٱلَّذِينَ
ءَامَنُواْ
لَا
تَتَّبِعُواْ
خُطُوَٰتِ
ٱلشَّيۡطَٰنِۚ
وَمَن
يَتَّبِعۡ
خُطُوَٰتِ
ٱلشَّيۡطَٰنِ
فَإِنَّهُۥ
يَأۡمُرُ
بِٱلۡفَحۡشَآءِ
وَٱلۡمُنكَرِۚ
وَلَوۡلَا
فَضۡلُ
ٱللَّهِ
عَلَيۡكُمۡ
وَرَحۡمَتُهُۥ
مَا
زَكَىٰ
مِنكُم
مِّنۡ
أَحَدٍ
أَبَدٗا
وَلَٰكِنَّ
ٱللَّهَ
يُزَكِّي
مَن
يَشَآءُۗ
وَٱللَّهُ
سَمِيعٌ
عَلِيمٞ
٢١
ऐ ईमान वालो! शैतान के पदचिह्नों पर न चलो और जो शैतान के पदचिह्नों पर चले, तो वह तो अश्लीलता तथा बुराई का आदेश देता है। और यदि तुमपर अल्लाह का अनुग्रह और उसकी दया न होती, तो तुममें से कोई भी कभी पवित्र न होता। परंतु अल्लाह जिसे चाहता है, पवित्र करता है, और अल्लाह सब कुछ सुनने वाला, सब कुछ जानने वाला है।