وَكَذَٰلِكَ
أَعۡثَرۡنَا
عَلَيۡهِمۡ
لِيَعۡلَمُوٓاْ
أَنَّ
وَعۡدَ
ٱللَّهِ
حَقّٞ
وَأَنَّ
ٱلسَّاعَةَ
لَا
رَيۡبَ
فِيهَآ
إِذۡ
يَتَنَٰزَعُونَ
بَيۡنَهُمۡ
أَمۡرَهُمۡۖ
فَقَالُواْ
ٱبۡنُواْ
عَلَيۡهِم
بُنۡيَٰنٗاۖ
رَّبُّهُمۡ
أَعۡلَمُ
بِهِمۡۚ
قَالَ
ٱلَّذِينَ
غَلَبُواْ
عَلَىٰٓ
أَمۡرِهِمۡ
لَنَتَّخِذَنَّ
عَلَيۡهِم
مَّسۡجِدٗا
٢١
और इसी प्रकार, हमने (लोगों को) उनसे अवगत करा दिया, ताकि वे जान लें कि अल्लाह का वादा सत्य है, और क़ियामत (के आने) में कोई संदेह1 नहीं। (याद करो) जब वे2 (उनके विषय में) आपस में विवाद करने लगे। कुछ लोगों ने कहा : उनपर कोई भवन निर्माण करा दो, उनका पालनहार उनके बारे में अधिक जानता है। जो लोग उनके मामले में प्रभावी रहे, उन्होंने कहा : हम तो उन (की गुफा के स्थान) पर अवश्य एक मस्जिद बनाएँगे।