और किसी (ऐसे) प्राणी को क़त्ल न करो, जिसे (क़त्ल करना) अल्लाह ने हराम किया है, परंतु अधिकार1 के साथ। और जिसे अन्यायपूर्ण रूप से क़त्ल कर दिया जाए, तो हमने उसके उत्तराधिकारी को (बदला लेने का) अधिकार2 दिया है। अतः वह क़त्ल (बदला लेने) में सीमा से आगे3 न बढ़े। निश्चय वह मदद किया हुआ है।