سَابِقُوٓاْ
إِلَىٰ
مَغۡفِرَةٖ
مِّن
رَّبِّكُمۡ
وَجَنَّةٍ
عَرۡضُهَا
كَعَرۡضِ
ٱلسَّمَآءِ
وَٱلۡأَرۡضِ
أُعِدَّتۡ
لِلَّذِينَ
ءَامَنُواْ
بِٱللَّهِ
وَرُسُلِهِۦۚ
ذَٰلِكَ
فَضۡلُ
ٱللَّهِ
يُؤۡتِيهِ
مَن
يَشَآءُۚ
وَٱللَّهُ
ذُو
ٱلۡفَضۡلِ
ٱلۡعَظِيمِ
٢١
अपने पालनहार की क्षमा तथा उस जन्नत की ओर एक-दूसरे से आगे बढ़ो, जिसका विस्तार आकाश तथा धरती के विस्तार के समान है, वह उन लोगों के लिए तैयार की गई है, जो अल्लाह और उसके रसूलों पर ईमान लाए। यह अल्लाह का अनुग्रह है। वह इसे उसको देता है जिसे चाहता है और अल्लाह बहुत बड़े अनुग्रह वाला है।