وَمَنۡ
أَظۡلَمُ
مِمَّنِ
ٱفۡتَرَىٰ
عَلَى
ٱللَّهِ
كَذِبًا
أَوۡ
كَذَّبَ
بِـَٔايَٰتِهِۦٓۚ
إِنَّهُۥ
لَا
يُفۡلِحُ
ٱلظَّٰلِمُونَ
٢١
तथा उससे बड़ा अत्याचारी कौन है, जिसने अल्लाह पर कोई झूठ गढ़ा, या उसकी आयतों को झुठलाया। निःसंदेह अत्याचारी कभी सफल नहीं होते।