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शपथ है (बादलों को) बिखेरने वालियों की!

— Maulana Azizul Haque al-Umari

फिर (बादलों का) बोझ लादने वालियों की!

— Maulana Azizul Haque al-Umari

फिर धीमी गति से चलने वालियों की!

— Maulana Azizul Haque al-Umari

फिर (अल्लाह का) आदेश बाँटने वाले (फ़रिश्तों की)!

— Maulana Azizul Haque al-Umari

निश्चय जिस (प्रलय) से तुम्हें डराया जा रहा है, वह सच्ची है।[ 1

— Maulana Azizul Haque al-Umari

तथा कर्मों का फल अवश्य मिलने वाला है।

— Maulana Azizul Haque al-Umari

शपथ है रास्तों वाले आकाश की!

— Maulana Azizul Haque al-Umari

वास्तव में, तुम विभिन्न[ बातों में हो। 1

— Maulana Azizul Haque al-Umari

उससे वही फेर दिया जाता है, जो (सत्य से) फिरा हुआ हो।

— Maulana Azizul Haque al-Umari

नाश कर दिये गये अनुमान लगाने वाले।

— Maulana Azizul Haque al-Umari

जो अपनी अचेतना में भूले हुए हैं।

— Maulana Azizul Haque al-Umari

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